दिव्यांगों की रोजी-रोटी पर चोट, बड़े अवैध कारोबारियों पर मेहरबानी?
मुंब्रा: पिछले कुछ दिनों से मुंब्रा में दिव्यांग व्यक्तियों के स्टॉलों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन द्वारा इन स्टॉलों को अवैध बताते हुए हटाया जा रहा है, लेकिन इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच कई सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि मुंब्रा में केवल स्टॉल ही नहीं, बल्कि कई अवैध इमारतें, अवैध बाजार, अवैध पार्किंग और अन्य प्रकार के अतिक्रमण भी मौजूद हैं। इन सभी के बावजूद कार्रवाई का केंद्र केवल दिव्यांगों के स्टॉलों को बनाए जाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता यूसुफ खान ने भी मांग की थी कि जिन लोगों के पास दिव्यांग होने के वैध प्रमाण नहीं हैं और जो दिव्यांगों के नाम पर स्टॉल चलाकर लाभ उठा रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि वास्तविक दिव्यांगों और फर्जी लाभार्थियों के बीच अंतर कर निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान केवल दिव्यांगों से जुड़े स्टॉलों को ही हटाया गया, जबकि आसपास मौजूद अन्य अतिक्रमणों, ठेलों और व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या कार्रवाई सभी के लिए समान रूप से की जा रही है या फिर कुछ विशेष वर्गों को ही निशाना बनाया जा रहा है।
दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ऐसे स्टॉल केवल व्यवसाय का माध्यम नहीं, बल्कि उनके और उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन होते हैं। ऐसे में यदि किसी प्रकार की कार्रवाई की जाती है तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वास्तविक दिव्यांगों के अधिकारों और आजीविका पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान चला रहा है तो वह अभियान निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल चुनिंदा स्थानों या व्यक्तियों पर कार्रवाई से सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
अब लोगों की नजर प्रशासन पर है और वे यह जानना चाहते हैं कि क्या मुंब्रा में मौजूद अन्य कथित अवैध निर्माणों, अवैध बाजारों, अवैध पार्किंग और अतिक्रमणों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिलेगी या नहीं।

मुख्य संपादक : वल्लुरी डेव्हिड राव
